किसान 26 मई को मनाएंगे काला दिवस


नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 मई को काला दिवस मनाने का ऐलान किया है। वामपंथी स्टाइल में यह प्रदर्शन होगा। 

आज एसकेएम की बैठक की अध्यक्षता किसान नेता राकेश टिकैत ने की।  निम्नलिखित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

 1. 26 मई को हम दिल्ली की सीमाओं पर अपने विरोध के 6 महीने पूरे कर रहे हैं।  यह केंद्र में आरएसएस-भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने का भी प्रतीक है।  इस दिन को देशवासियों द्वारा "काला दिवस" के रूप में मनाया जाएगा। पूरे भारत में गांव और मोहल्ला स्तर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होंगे जहां दोपहर 12 बजे तक किसान मोदी सरकार के पुतले जलाएंगे।  किसान उस दिन अपने घरों और वाहनों पर काले झंडे भी फहराएंगे।  इस मौके पर एसकेएम ने सभी जन संगठनों, ट्रेड यूनियनों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर संगठनों से किसानों की मांगों के समर्थन में काला झंडा धरना प्रदर्शन करने की अपील की है. दिल्ली के सभी मोर्चो पर भी उस दिन विशाल काले झंडे का प्रदर्शन किया जाएगा।

 2. एसकेएम ने एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी को लागू करने और 3 काले कानूनों को रद्द करने की अपनी मांगों पर भाजपा को दंडित करने के लिए एक "मिशन यूपी और उत्तराखंड" शुरू करने का फैसला किया है। इसमें पूरे देश से सभी किसान बलों की रैली होगी।  यह कार्यक्रम पूरे भारत के सभी संघर्षशील किसान संगठनों की भागीदारी के साथ शुरू किया जाएगा और इसे इन राज्यों में आयोजित किया जाएगा। सयुंक्त किसान मोर्चा के सदस्य व उत्तर प्रदेश से किसान नेता युद्धवीर सिंह इसके लिए एक योजना तैयार करेंगे और इसे एसकेएम के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

 3. एसकेएम की आम सभा ने कोरोना वायरल संक्रमण के शिकार लोगों के लिए उचित और पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था करने में विफल रहने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की विफलता की कड़ी निंदा की।  ऑक्सीजन, अस्पताल में बेड और दवाओं की भारी कमी और कालाबाजारी के कारण अधिकांश मौतें अस्पतालों के बाहर हुई हैं।  एसकेएम सरकार से सभी गांवों और ब्लॉकों में इसके लिए उचित और मुफ्त व्यवस्था करने का आग्रह करता है। इसमें सभी नागरिकों को मुफ्त टीकों का प्रावधान शामिल होना चाहिए।

 4. एसकेएम की बैठक ने अपने अखिल भारतीय सम्मेलन की पूरी तैयारी शुरू कर दी है जिसमें देश भर के किसानों और नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी की घोषणा बाद में की जाएगी।

 5. दो दिनों के भीतर एसकेएम दिल्ली के सभी धरना स्थलों पर अपनी महिला सुरक्षा समितियों के नामों की घोषणा करेगा जो आंदोलन में भाग लेने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों व संबंधित मुद्दों पर काम करेगी।

हरियाणा के शाहबाद के जजपा के विधायक रामकरण काला को किसानों ने घेर लिया व किसान विरोधी निर्णयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का यह गुस्सा इन्ही नेताओं की किसान विरोधी बयानबाजी और भाजपा का साथ देने के कारण बाहर आ रहा है। खट्टर सरकार सिर्फ जोड़ तोड़ की सरकार रह गयी है व राज्य की जनता में से विश्वास खो चुकी है।

किसानों के मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की आज पुण्यतिथि पर सयुंक्त किसान मोर्चा उन्हें नमन करता है। समूचे किसान समाज को उन्होंने अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक लड़ना सिखाया है। अनेक आंदोलनों के माध्यम से केंद्र व राज्यों की सरकारों से किसान विरोधी फैसले वापस करवाये थे। चौधरी टिकैत आज के आंदोलन के भी प्रेरणास्त्रोत है। किसान समाज के लिए उनका योगदान अतुलनीय है व हमेशा याद रखा जाएगा।

पंजाब के किसान संगठनों ने परसों बैठक कर निर्णय लिया कि वर्तमान किसान आंदोलन के साथ साथ पंजाब में भी गन्ना किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ना है। किसान नेताओ का कहना है कि पिछले पांच साल से राज्य में गन्ने का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। किसान नेताओ ने कहा कि कम से कम 350 ₹ प्रति कविंटल किया जाए नहीं व गन्ना किसानों की बकाया राशि उन्हें दी जाए। ऐसा नहीं होने पर पंजाब में भी किसानों के पक्के मोर्चे लगेंगे और हर सुगर मिल के बाहर किसान मोर्चा लगाएंगे।

आज शहीद भगतसिंह के साथी और स्वतंत्रता सेनानी शहीद सुखदेव का जन्मदिन है। शहीद सुखदेव ने समाजवादी सोच के जरिये देश के किसानो मजदूरो के शोषण की मुक्ति के लिए अपनी जान दी थी। किसान मोर्चो पर आज शहीद सुखदेव को याद करते हुए नेताओ ने कहा कि किसान शहीदों के सपनो को मंजिल तक पहुंचाएंगे। इस संघर्ष के माध्यम से कंपनियों द्वारा सरकारों के जरिये किये जा रहे शोषण से मुक्ति मिलेगी।

शहीद भगतसिंह के भतीजे और सामाजिक नेता अभय संधू का कल निधन ही गया जिस पर सयुंक्त किसान मोर्चा गहरा शोक व्यक्त करता है। अभय संधू लगातार सिंघु बॉर्डर व अन्य धरनों पर आ रहे थे व किसानों को खुलकर समर्थन दिया था। सयुंक्त किसान मोर्चा ने पगड़ी संभाल दिवस पर उन्हें सम्मानित भी किया था। अभय संधू ने घोषणा की थी कि अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं होती तो वे सरकार के खिलाफ आमरण अनशन करेंगे। खराब स्वास्थ्य स्थिति से हुई आकस्मिक मौत पर हम गहरा खेद व्यक्त करते है। अभय संधू बहुत संवेदनशील इंसान थे जिसे जनता हमेशा याद रखेगी।

 जारीकर्ता -  बलबीर सिंह राजेवाल, गुरनाम सिंह चढुनी, जगजीत सिंह दल्लेवाल, योगेंद्र यादव, डॉ आशीष मित्तल, डॉ सतनाम सिंह अजनाला, अभिमन्यु कोहाड़।

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