कारोबारियों ने किया पाबंदियों का विरोध, क्या भाजपा की रैलियों में कोरोना नहीं होता



चण्डीगढ़

पंजाब के अमृतसर में होटल, रिजॉर्ट और रेस्तरां मालिकों ने कोविड की पाबंदियों  को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. ये सभी कारोबारी सड़कों पर धरने प्रदर्शन पर उतर आए हैं. इनका कहना है कि सरकार होटल, रिजॉर्ट और रेस्तरां  पर लगाई गई पाबंदियों को वापस ले.

प्रर्दशन कर रहे कारोबारियों ने सरकार  से एक बड़ा सवाल भी किया है कि यदि राजनीतिज्ञ अपनी सत्ता को बचाने के लिए रैलियां कर सकते हैं, तो हम अपने काराबोर को बचाने के लिए प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते. प्रदर्शन कर रहे इन लोगों का यह भी कहना है कि पांच राज्यों में हो रहे चुनावों में बड़ी-बड़ी रैलियां की जा रही हैं, उन रैलियों में लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं वहां कोरोना नहीं है, जबकि कोरोना वहां फैल रहा है जहां पर रैलियां नहीं हो रही हैं.

गौरतलब है कि सरकार ने 10 अप्रैल तक पाबंदियां जारी रखने का आदेश दिया है. मॉल में एक वक्त में 100 से अधिक व्यक्तियों को इजाजत नहीं होनी चाहिए और सिनेमाघरों को आधी सीटें खाली रखने को कहा गया है. सबसे अधिक प्रभावित 11 जिलों में अंतिम संस्कार एवं शादियों को छोड़कर सभी सामाजिक जमावड़े पर पूर्ण पाबंदी लगायी गयी है. अंतिम संस्कार एवं शादियों में भी 20 लोगों को ही इजाजत है.
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई नेता बड़ी रैलियां कर रहे हैं. इन रैलियों में लोग काविड के नियमों का सरेआम उल्लंघन कर रहे हैं. रैलियों में लोग न तो मास्क का प्रयोग कर रहे हैं और न ही दो गज की दूरी के सिद्धांत का पालन कर रहे हैं. इससे आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रैली में कोरोना नहीं फैलता.

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