रमजान के लिए खरीदारी, रौनक रही गायब


मुजफ्फरनगर । रमजान की आमद के साथ बुधवार को पहला रोजा रखा जाएगा। पहले रोजे की सहरी के लिए मुस्लिम मौहल्लों में खजला, फेनी, सिवईयां, दूध, गोल पाप्पे और रस की जमकर खरीददारी की। इस बार भी कोरोना के चलते सामूहिक नमाज और तराबीह पर पाबंदी रहेगी। देर रात तक रहने वाली रौनक गायब रही। 

मुस्लिमों के लिए रमजान के पवित्र महीने की खास अहमियत होती है। रमजान के महीने को खुदा की इबादत के साथ ही रहमत और बरकत का महीना माना जाता है। मुस्लिम लोग रमजान के पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं और नमाज अदा करते हैं। रोजा इफ्तारी के बाद तरावीह पढ़कर नवाज अदा करते हैं क़ुरआन की तिलावत करते हैं। हिलाल कमैटी की ओर से शहर काजी तनवीर आलम ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि रमजान माह का पहला रोजा बुधवार 14 अप्रैल को होगा। रमजान के पहले रोजे की सहरी के लिए लोगों ने बाजार से फेनी, सिवईंयां, खजला, दूध, ब्रेड और रस आदि की खरीददारी की। बाजार में खजूर की बिक्री भी रही। हालांकि कोरोना के कारण दूसरे मुल्क से खजूर की आवक कम होने के कारण खजूर के दाम 120 रुपए से 400 रुपए प्रति किलो तक रहे। मंहगाई का असर खरीददारी पर दिखा। इस दौरान लोगों में कोरोना की गाइड लाइन लागू होने के बावजूद रमजान माह के शुरू होने को लेकर भारी उत्साह देखा गया।

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