Wednesday, March 31, 2021

कवियों की होली में चली व्यंग्य की पिचकारियाँ


मुजफ्फरनगर । होली के पावन पर्व के सुअवसर पर "शब्द संसार साहित्यिक मंच" मुजफ्फरनगर द्वारा ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

आयोजन का शुभारंभ शब्द संसार मंच की संस्थापिका सविता वर्मा 'ग़ज़ल' सभी आमंत्रित कवि-कवियित्रियों को होली के पावन पर्व की शुभ मंगलकामनाएं देकर किया।

कुशल संचालन मनु श्वेता 'मनु' खतौली ने इन पंक्तियों के साथ किया-

"आज तो गिरह मन की खोलो।

एकता की पिचकारी में

रंग पर का घोलो"।

अजंलि गोयल किरतपुर ने माँ सरस्वती की वंदना व सुंदर काव्यपाठ कर किया।

नजीबाबाद ने नीमा शर्मा "हँसमुख'' ने भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की 

 "इस बार होली ,ना भाये मेरी माँ

एक तेरे जाने का है गम 

बहना में बसती थी मेरी जाँ । । 

 सुमन प्रभा मुजफ्फरनगर ने अपनी सुंदर रचना सुनाकर सबका मन मोह लिया।

 भुला कर द्वेष दिलों से

आओ हम होली खेलें

रंगों भरी इस बेला पर

दुश्मन को भी संग लेले।। 


राकेश दुलार ने अपनी कविता के माध्यम से 

अजन्मी बेटी की व्यथा को कुछ यूं बयाँ किया-

 रो रोकर बेटी अपनी अपनी फरियाद सुनाये

मत मारो कोख में हमको,मत करो भ्रूण हत्याएं।


रश्मि लहर लखनऊ से ने बहुत एक से बढ़कर एक होली की रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी।-

सजा लो  कल्पना के  रंग

रंगोली-नेह की  रख लो

गले मिल लो शगुन से तुम

हृदय उत्साह से ढक लो..।

वीर सिंह 'फ़राज़' मुजफ्फरनगर ने अपनी होली की सुंदर प्रस्तुति के द्वारा आयोजन में चार चांद लगा दिये-


 शौक़ की महफ़िल 

बढ़ाएं  प्यार  होली   पर,

गिराएं  आओ नफ़रत की

हर इक दीवार होली पर।।

वरिष्ठ कवियित्री सुशीला शर्मा मुजफ्फरनगर ने उत्कृष्ट गीत सुनाकर रंगों से सराबोर कर दिया-

 हमारा तन-मन रंग डाला।

बड़ा हठीला श्याम

 साँवरा ,

गोकुल का ग्वाला।।


डॉ.रिजवान छपार ने बेहद उम्दा अशआर पेश किये-

खुद को इतना भी न सताया कर

कभी खुल के भी मुस्कुराया कर

गैरों की ख़ातिर सज़े दस्तरख़्वान।

रिश्तें अपनों से भी  निभाया कर।।


पवन भारतीय मुजफ्फरनगर ने बहुत सुंदर होली की रचनाएं सुनाई-

 रंग, गुलाल, अबीर से तुम ,

खेलों ऐसे होली ।

खुशी में झूमें बूढ़े , बच्चे,

मिलकर सखा सहेली ।।


महेश वर्मा हापुड़ ने आज के हालात पर  व्यंगात्मक प्रस्तुति दी-

हो आजकल बेरंग क्यूं त्यौहार है।

क्यूं नहीं दिल में जगह, क्यूं आपसी तकरार है।।

रंग तो थोड़े मिलेंगे, होली के, बाजार में...

रंग बदलने वाले गिरगिट की यहां भरमार है।।

आयोजन के अन्त में सविता वर्मा 'ग़ज़ल' (संस्थापिका शब्द संसार साहित्यिक मंच) ने सभी आमंत्रित कवि व कवियित्रियों का आभार व्यक्त किया।

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