खुले में सोने को मजबूर है ये परिवार

मुज़फ्फरनगर।


क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ठण्ड के बीच मीरापुर  के मौहल्ला मुश्तर्क में गरीब सूरजमल कश्यप का परिवार खुले में सोने को मजबूर है। हालांकि सूरजमल के दो पुत्र भी थे जिनमें से एक पुत्र सुनील का देहान्त करीब तीन वर्ष पूर्व हो गया था। जबकि दूसरा पुत्र देवेन्द्र कश्यप गाजियाबाद में रहकर मेहनत मजदूरी कर परिवार की गुजर बसर कर रहा था। देवन्द्र ने करीब तीन वर्ष पूर्व मीरापुर में रह रहे अपने बुजुर्ग माता व पिता व बहन के रहने के लिए माँ शान्ति देवी के नाम से प्रधानमंत्री आवास-योजना के अंतर्गत मकान बनाने का आवेदन किया था। कई बार लिस्ट में नाम आने व पात्र होने के बाद भी नाम कट जाता था। करीब एक वर्ष पूर्ण आवेदन स्वीकार हुआ।  जिसकी एक किश्त 50000 रुपये की जून माह आई तो देवेन्द्र व उसके परिवार की खुशी का ठिकाना नही रहा और किश्त आते ही परिजनों ने पुराना मकान ढाह कर नए मकान की नींव भर दी गई। किन्तु जून माह के बाद दूसरी किश्त नही आई जिससे मकान का कार्य अधर में ही लटक गया। दूसरी किश्त के लिए परिजनों ने सभासदों से लेकर अधिकारियों के चक्कर काटने शुरू किए किन्तु सफलता न मिलने पर देवेन्द्र के 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता सूरजमल कश्यप व 75 वर्षीय माता शान्ति देवी छत के नाम पर पल्ली टांगकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने लगे। जबकि देवेन्द्र दूसरी किश्त न आने पर गाजियाबाद में जाकर मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हो गयी। जहाँ कल शनिवार को देवेन्द्र का आकस्मिक निधन हो गया। जिसके बाद उसका शव मीरापुर  लाया गया। जहाँ से उसे मौहल्लेवासियो व बुजुर्ग-माता पिता तथा परिजनों ने उसे नम आंखों से अन्तिम विदाई दी। दूसरे पुत्र की भी अचानक मौत हो जाने से सूरजमल काफी आहत है और कड़कड़ाती ठण्ड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर है।

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