Sunday, September 5, 2021

किसान नहीं दलाल हैं परेशान : योगी आदित्यनाथ


वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परेशानी किसानों को नहीं उनके नाम पर दलाली करने वालों को हो रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए आजादी के बाद पहली बार सबसे ज्यादा काम हुए हैं। केंद्र की तरफ से कृषि सिंचाई योजना हो या प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि या खेती किसानी के क्षेत्र में तकनीक को बढ़ाने के तमाम काम हुए। जिन्हें यह काम पसंद नहीं वो लोग किसानों को मोहरा बनाकर गुमराह कर रहे हैं। आज किसान परेशान नहीं है। किसानों के नाम पर दलाली करने वाले लोग परेशान हैं। 

एक समाचार पत्र के आयोजन में सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले किसान आत्महत्या कर रहे थे लेकिन हमारी सरकार आने के बाद आत्महत्याएं बंद हैं। हमारी सरकार बनने के बाद आत्महत्या का कारण पता किया तो मालूम हुआ कि किसानों को लागत नहीं मिल रही है। क्रय केंद्र नहीं चल रहे हैं। सबसे पहले सरकार ने किसानों के कर्ज माफी का काम किया। पहली बार किसानों से सीधे क्रय करने और उनका दाम सीधे उनके एकाउंट में देने का काम किया गया।

राकेश टिकैत के आरोपों पर सीएम योगी ने कहा कि गन्ना किसानों का सबसे ज्यादा बकाया हम लोगों ने दिया। रमाला चीनी मिल बंद होने के कगार पर थी, हमारी सरकार ने नई लगवाई। सपा-बसपा ने बंद चीनी मिलों को बेच दिया था। हम लोगों ने बंद चीनी मिलों को चलाने का काम किया है। चीनी मिलें केवल गन्ना पेरने तक सीमित न रहें, उसका भी प्रयास किया। चीनी मिलों को एथनाल प्लांट लगाने की अनुमति दी। 2021-2022 तक की 84 फीसदी तक के गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया गया है। नया सीजन आने तक भी उनका मूल्य मिल जाएगा।  

मुलायम सिंह यादव का बिना नाम लिये सीएम योगी ने कहा कि धरती पुत्र आए और बेदखल हो गए। किसानों के लिए कुछ नहीं किया। बाण सागर परियोजना मोरारजी के समय से लटकी थी। आज पूरी होने जा रही है। हजारों किसानों को इसका लाभ होगा। अब्बा जान के सवाल पर सीएम योगी ने कहा कि 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री ने राममंदिर का शिलान्यास किया था। कुछ लोग उसके खिलाफ थे। लोग बोलते थे कि परिंदा पर नहीं मार सकता। कुछ लोग उस समय गोली चला रहे थे। उस समय वोट बैंक की जो राजनीति हुई, वह नहीं होती तो इतना खून खराबा नहीं होता। आपको मुस्लिम वोट चाहिए लेकिन अब्बा जान से परेशानी है। जनता को इनकी वास्तविकता का पता चल गया है। जो लोग राम कृष्ण को नकारते थे अब कहते हैं कि वह हमारे हैं।

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