इस स्थिति में है आक्सीजन की जरूरत


 लखनऊ। चिकित्सकों के अनुसार अगर रोगी की सांस भर आ रही हो और उसे हर दो सेकेंड में सांस लेने की जरूरत पड़ रही है तो रोगी को गंभीर समझा जाएगा। उसे ऑक्सीजन की जरूरत है और वह उपचार की व्यवस्था कर ले। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कोरोना के इलाज के लिए नई गाइड लाइन जारी कर दी है।

इसमें नरम संक्रमण, संयत और गंभीर स्थिति के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी गई है। शहर के ज्यादातर लोगों के पास पल्स ऑक्सीमीटर नहीं हैं और न ही अस्पतालों में संक्रमितों को तुरंत सुविधा मिल पा रही है। कुछ लोग शक के आधार पर अस्पताल पहुंच जा रहे हैं और संक्रमण ले लेते हैं। एम्स और आईसीएमआर की नई गाइड लाइन के हिसाब से वह एक मिनट में सांसों की मोटे तौर पर गिनती कर अपनी रोग श्रेणी का अंदाजा लगा सकते हैं।

अगर किसी को सांस में कोई तकलीफ नहीं है वह नरम श्रेणी में है तो होम आइसोलेशन उसके लिए उपयुक्त है। उसे कोविड गाइड लाइन भर का पालन करना पड़ेगा। अगर किसी व्यक्ति को संक्रमण मिल गया है। उसे लक्षण उभर रहे हैं, लेकिन एक मिनट में वह 24 बार सांस ले रहा है। रूम एयर पर उसका ऑक्सीजन लेवल 90 से 93 फीसदी है तो वह संयत की श्रेणी में आएगा।

उसे आईसीयू की जरूरत नहीं है। वह कोविड वार्ड में भर्ती हो जाए। उसे हल्की आक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति रूम एयर पर हर दो सेकेंड में सांस ले रहा है। सांस मेें हल्की दिक्कत है और रूम एयर पर आक्सीजन लेवल 90 फीसदी है तो उसे आईसीयू की जरूरत है। उसे हाई फ्लो नेजल कैनुला भी लगाया जाना चाहिए। गाइड लाइन में कहा गया है कि ऐसे रोगी के खून का थक्का न जमने पाए, उसे एंटी कॉग्युलेशन दवा की जरूरत भी रहती है। 

कोरोना के इलाज की नई गाइड लाइन में रेमडेसिविर के इस्तेमाल के संबंध में भी बता दिया गया है। इसमें साफ किया गया है कि गुर्दा और लिवर की खराबी में यह दवा न दें। संयत और गंभीर स्थिति के बीच के रोगी को दें। कोरोना के लक्षण उभरने से 10 दिन के अंदर दें। जो रोगी ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं हैं और होम आइसोलेशन में हैं, उन्हें रेमडेसिविर देने से मना किया गया है। सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि डॉक्टर एम्स की गाइड लाइन के अनुसार ही रेमडेसिविर का इस्तेमाल करें।

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