बजट में जोर का झटका धीरे से


नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल पर 2.50 रुपये और डीजल पर 4 रुपये का कृषि सेस लगाने का ऐलान किया। हालांकि, ऐसा कहा जा रहा है कि इसका असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा और ये सेस कंपनियों को देना होगा। मगर आशंका जताई जा रही है कि बाद में कंपनियों की मनमानी की कीमत कहीं उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ सकती है। 

कोरोना काल में टैक्स पेयर्स को कुछ छूट मिलने की उम्मीद थी, मगर वे खाली हाथ रह गए। इस बजट में उनके लिए कुछ भी नहीं है। मिडिल क्लास और नौकरी-पेशा वालों के लिए न तो कोई अतिरिक्त टैक्स छूट दी गई और न ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव किया गया। कम सैलरी वाले टैक्सपेयर्स, मिडिल क्लास और छोटे-मोटे बिजनेस करने वालों को टैक्स को लेकर सबसे अधिक उम्मीदें थीं, मगर उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में इस बार कोई भी बदलाव नहीं किया। इस तरह से मध्यम वर्गीय लोगों को पहले की तरह ही टैक्स नियमों का पालन करना होगा। सिर्फ 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को राहत मिली है। 

सरकार के इस बजट से मोबाइल खरीदने की चाह रखने वालों को झटका लगा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोबाइल उपकरण पर कस्टम ड्यूटी को बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल उपकरण पर अब कस्टम ड्यूटी 2.5 फीसदी तक लगेगा। आंकड़ों की मानें तो पिछले 4 साल में सरकार ने इन मोबाइल प्रोडक्ट्स पर औसतन करीब 10 फीसदी तक इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है। मोबाइल आज के वक्त में हर इंसान की जरूरत है, ऐसे में अगर यर प्रोडक्ट महंगा हुआ तो इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। 

मोदी सरकार ने अपने बजट में इन्फ्रास्ट्रक्टर और हाईवे निर्माण को लेकर बड़े ऐलान किए हैं। बंगाल से लेकर असम तक में राजमार्गों का निर्माण होगा। इस काम से भले ही काफी लोगों को रोजगार मिलेगा, मगर बजट में रोजगार सृजन को लेकर न तो कोई स्पष्ट और प्रत्यक्ष तौर पर बात की गई है और न ही इसे लेकर कोई ठोस रोडमैप दिखाया गया है। देश में इस साल कितने रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, इसे लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं दिखी। 

किसान आंदोलन को ध्यान में रखते हुए ऐसी उम्मीद थी कि इस बजट में खेती-किसानी पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है और पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम में मिलने वाले पैसे को बढ़ाया जा सकता है, मगर ऐसा नहीं हुआ। पीएम किसान योजना के तहत अभी हर साल 6,000 रुपए मिलते हैं और ऐसी उम्मीदे थीं कि इसमें 3,000 रुपए का इजाफा हो सकता है। मगर ऐसा नहीं हुआ। अब तक इस योजना का लाभ 11 करोड़ 52 लाख किसान उठा रहे हैं। कई विशेषज्ञ यह मान रहे थे कि मोदी सरकार किसान आंदोलन को देखते हुए यह फैसला ले सकती है, मगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषणों में ऐसा कुछ भी नहीं दिखा। 

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