किसानों को आंदोलन का सियासी सच बताने मैदान में उतरेंगी भाजपा की सियासी तोपें

 नई दिल्ली । वेस्ट यूपी, हरियाणा और पंजाब में किसानों खासकर जाटों को संभालने के लिए भाजपा अपनी सियासी तोपों को मैदान में उतारेगी। भाकियू पर काउंटर अटैक की रणनीति पार्टी ने तैयार की है। 

किसान आंदोलन में राजनीतिक पुट आने के बाद भाजपा के किसान नेता खापों और किसानों को समझाने निकलेंगे। वेस्ट यूपी में जाटों के बीच इस अभियान की कमान केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान संभालेंगे। खास बात है कि जाटों की जिस खाप के संजीव बालियान हैं, उसी खाप से भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान के आवास पर पश्चिमी यूपी के सभी जाट नेताओं की बैठक पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह ने ली। बैठक 


में कहा गया कि किसान आंदोलन के बहाने विपक्ष राजनीतिक हित साधने में जुटा है। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर से लोकसभा सांसद संजीव बालियान ने कहा कि नए कृषि कानूनों के बारे में गलतफहमियां दूर करने और किसानों को उनके फायदे बताने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी। बालियान के आवास पर हुई बैठक में बीजेपी के उत्तर प्रदेश सह-प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव सत्या कुमार, उत्तर प्रदेश के सह-संगठन मंत्री कर्मवीर सहित सभी पश्चिमी यूपी के सभी प्रमुख विधायक शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, बैठक में यह भी कहा गया कि जगह-जगह पंचायतों के जरिए राकेश टिकैत जाटों का चेहरा बनने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में बीजेपी नेताओं को इस बारे में सोचना होगा और गांव-गांव जाकर जाटों को समझाना होगा। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के मुद्दों और इस संबंध में पार्टी की रणनीति पर चर्चा की। यह बैठक संयुक्त किसान मोर्चा के गुरुवार को आयोजित होने वाले रेल रोको आंदोलन के ठीक एक दिन पहले हुई। 

 बैठक के बाद संजीव बालियान ने कहा कि सरकार और किसानों के बीच कायम गतिरोध तोड़ने का एक मात्र उपाय बातचीत है। उन्होंने विपक्षी दलों पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेता किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उनका रवैया गिद्ध जैसा है। बालियान ने कहा कि सरकार में होने के कारण हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम किसानों को आश्वस्त करें। किसानों से संपर्क कर कृषि कानूनों के बारे में उनकी आपत्तियां सुनने और उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए बातचीत ही एक मात्र रास्ता है।

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