गाजीपुर बॉर्डर पर विशाल टेंट में चलेगा अब धरना


गाजीपुर । तीनों कृषि कानूनों  को वापस करने की मांग को लेकर आंदोलित किसानों ने अब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर धरने में आने वाले किसानों को गर्मी से बचाने के लिए बड़े टैंट का इंतजाम कर लिया है। इस बीच केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने नए कृषि कानूनों को किसानों के लिए बेहद आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश की जीडीपी में कृषि का हिस्सा लगभग आधा हुआ करता था जो अब बहुत कम हो गया है, जबकि दूसरे क्षेत्र कृषि से बहुत आगे निकल गए। इसका सबसे बड़ा कारण रहा कि दूसरे क्षेत्रों में समय-समय पर बदलाव किए गए, उनके लिए नए-नए कानून बनाए गए और उनके लिए निजी पूंजी का रास्ता साफ किया गया। लेकिन कृषि में समय के साथ कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसके कारण यह दूसरे क्षेत्रों से पिछड़ गया। उन्होंने उलटे किसानों से ही पूछ डाला कि अगर सरकार किसानों की स्थिति बदलने की कोशिश कर रही है तो क्या ऐसी स्थिति में इस तरह के किसान आंदोलन होने चाहिए?

गर्मी बढने के साथ में किसानों का धरना स्थल पर बैठना थोड़ा मुश्किल हो गया था. इसके चलते अब संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की सुविधा के लिए टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था कर दी है। टेंट लगने के बाद आज धरना स्थल पर किसानों की तादाद भी काफी नजर आई। मोर्चा का कहना है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर संचालित संयुक्त किसान धरने पर मंच के आगे टेंट लग कर तैयार हो गया है. इसके बाद मंच के सामने किसानों की मौजूदगी भी बढ़ गई है। 

धरने पर किसानों की मौजूदगी कम नजर आने के बारे में किसान नेताओं का कहना है कि किसान आंदोलन स्थल से कहीं नहीं चले गए थे। धूप तेज होने के कारण आंदोलनकारी छांव में इधर उधर चले जाते थे। जैसे ही अब मंच के सामने टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था हो गई है, फिर आंदोलनकारियों की संख्या मंच के सामने नजर आने लगी है। किसान नेताओं का कहना है कि किसान ने टेंट लगाकर धूप की चुनौती का सामना करने का जुगाड़ ठीक उसी तरीके से कर लिया है जैसे वह अपने खेत में आमतौर पर करता रहता है। भारतीय किसान यूनियन  के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत  ने कहा है कि किसान अपने खेत पर भी नजर रखें और आंदोलन पर भी। नंबर-बारी से आंदोलन स्थल पर आएं और उसी क्रम में अपने खेत का काम भी देखते रहे हैं.। आंदोलन स्थल पर जब संख्या बढाने की जरूरत होगी, बता दिया जाएगा।

उधर पूसा किसान मेले में किसानों को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज देश के 86 फीसदी किसानों के पास दो हेक्टेयर से भी कम भूमि है। इनमें कोई बड़ा निवेश नहीं हो पाता। इससे इन किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंचता है। लिहाजा उनकी खेती कर्ज में डूबती जाती है और घाटे का सौदा बनी रहती है। इस स्थिति से निराश किसानों के बेटे खेती छोड़ रहे हैं और शहरों में जाकर नौकरी की तलाश कर रहे हैं। लेकिन अगर उनकी खेती को ही लाभ का सौदा बना दिया जाता, तो यह पलायन रुक सकता है। नए कृषि कानूनों के सहारे सरकार यही करने की कोशिश कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसा मॉडल खड़ा करना चाहती है, जहां किसान अपनी मर्जी से अपनी फसल कहीं भी बेच सकें, मंडी के अंदर या बाहर अपनी सुविधा के अनुसार फसलों की कीमत प्राप्त कर सकें। इसमें कहीं भी भूमि का समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके बाद भी किसानों को भड़काने की कोशिश की जा रही है।


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