गाजीपुर बॉर्डर पर इंटरनेट और यातायात बंद


मुजफ्फरनगर । गाजीपुर बॉर्डर पर राजमार्ग 24 पर यातायात और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई हैं। हरियाणा के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजधानी दिल्ली में सिंघु, गाजीपुर, टीकरी बॉर्डर और उनके आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यहां 29 जनवरी को रात 11 बजे से 31 जनवरी को रात 11 बजे तक के लिए इंटरनेट सेवा पर रोक लगाई गई है। 

सरकार ने सभी निजी और सरकारी टेलिकॉम कम्पनियों से इन आदेशों का पालन करने को कहा है। माना जा रहा है कि सरकार ने ये आदेश किसान आंदोलन के मद्देनजर क्षेत्र में शांति, सार्वजनिक व्यवस्था तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी किए हैं। बता दें कि राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद धीमा पड़ा किसानों का आंदोलन शुक्रवार से एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है और धरनास्थलों पर भीड़ बढ़ने का सिललिसा लगातार जारी है।  

इससे पहले हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने शुक्रवार शाम को राज्य के सभी 22 में से 17 जिलों में तुरंत प्रभाव से इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी थी। हालांकि 5 जिलों में इंटरनेट अब भी चल रहा है। जानकारी के अनुसार, सोनीपत, पलवल व झज्जर में पहले ही इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगी हुई थी। कल जिन 14 और जिलों में इंटरनेट सेवा रोकी गई उनमें - अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, पानीपत, हिसार, जींद, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, रेवाड़ी और सिरसा जिले शामिल हैं। इन जिलों में वॉयस कॉल को छोड़कर इंटरनेट सेवाओं को 30 जनवरी, 2021 शाम 5 बजे तक के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है। वहीं प्रदेश के जिन 5 जिलों में इंटरनेट सेवा चल रही है उनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पंचकूला और महेंद्रगढ़ शामिल हैं।  

सरकार ने ये आदेश क्षेत्र में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए जारी किए हैं। सरकार ने सभी टेलिकॉम ऑपरेटरों को इन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। राज्य सरकार ने एसएमएस, वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर आदि विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों से दुष्प्रचार और अफवाहों का प्रसार रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद रखने की अवधि अगले 24 घंटे और बढ़ाने का निर्णय लिया था।

बता दें कि, गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों के हिंसक प्रदर्शन के बाद हरियाणा सरकार ने शांति एवं व्यवस्था भंग होने से रोकने के लिए सोनीपत, झज्जर और पलवल तीनों जिलों में मंगलवार को ही मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं। 

हरियाणा के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि हरियाणा की सीआईडी के एडीजीपी द्वारा संज्ञान में लाया गया है कि हालात अब भी तनावपूर्ण हैं और हरियाणा से सटे एनसीआर के इलाकों में हिंसा फैल सकती है जो कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के चलते उत्पन्न हुई थी।

दूसरी ओर दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद गुरुवार को सरकार द्वारा किसान आंदोलन को खत्म करने की कोशिशों के दौरान गाजीपुर बॉर्डर के धरनास्थल पर टेंट हटाकर बिजली-पानी तक काट दिए गए थे। इसके बावजूद किसान टस से मस नहीं हुए और उन्होंने इसका तोड़ निकालते हुए धरनास्थल पर बिजली की व्यवस्था करने के लिए सोलर पैनल और सोलर इन्वर्टर लगाने शुरू कर दिए हैं। किसानों ने मोबाइल फोन चार्ज करने लिए कई जगहों पर चार्जिंग प्वॉइंट भी बनाए हैं।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की अपील के बाद यहां पर एक बार फिर से किसानों की संख्या बढ़ने लगी है। 26 जनवरी के बाद ऐसा लग रहा था कि अब आंदोलन लगभग समाप्त हो गया है, लेकिन गुरुवार शाम गाजीपुर बॉर्डर पर डटे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के वीडियो टीवी चैनलों पर चलने के बाद माहौल तेजी से बदल गया और किसानों का फिर से धरनास्थलों पर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। 

गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के समर्थक किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है। मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुराबादाबाद एवं बुलंदशहर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से भारी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल होने के लिए यूपी गेट पहुंचे हैं। राकेश टिकैत के नेतृत्व में बीकेयू सदस्य पिछले साल 28 नवंबर से यहां पर धरने पर बैठे हैं। 

हालांकि, गाजीपुर बॉर्डर पर अब भी काफी संख्या पर पुलिस बल तैनात है और हालात पर नजर बनाए रखने के लिए लगातार ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कोई आपराधिक तत्व आंदोलन में शामिल होकर माहौल न बिगाड़ दे, इसके लिए ऐसा किया जा रहा है।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों - द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं। केन्द्र सरकार इन तीनों कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे।

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