Friday, October 8, 2021

कार्यशाला में बताई पैकेजिंग की बारीकियां


मुजफ्फरनगर। श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में ललित कला विभाग में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय परिसर में किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के चैयरमेंन डॉ0 एस0 सी0 कुलश्रेष्ठ रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष ललित कला विभाग की महत्ता को समझाया। कार्यशाला में नेषनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी चेन्नेई से आये स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले पेकेजिंग डिजाइनर रष्किन मलिक ने डेमोस्ट्रेशन देते हुए कहा, कि विज्ञापन में वस्तु के पेकेजिंग की भुमिका मुख्य रूप में होती है। पेकेज के माध्यम से ही वस्तुओं की भिन्नता का बोध होता है। तथा उपभोक्ता को आकर्षित करता है। आज पेकेजिंग हमारे जीवन का एक मुख्य अंग बन गया है। पेकेजिंग उत्पादन सेवा या विचार को बेचने के लिए उपभोक्ता से संपर्क का सशक्त माध्यम है। पेकेजिंग हमारे देष में अपितु पूरे विश्व में एक तेजी में विकसित होते व्यापार के रूप में उभर रहा है। औद्योगिकरण के फलस्वरूप अपने-अपने उत्पादनों को बेचने की प्रतिस्पर्धा की होड में प्रत्येक कम्पनी में पेकेजिंग बजट बढता जा रहा है। इसका अनुमान हिन्दुस्तान लिवर के बजट से लगाया जा सकता है। जिनका पेकेजिंग पर होने वाला व्यय 1200 करोड रूपये है।  रष्किन मलिक ने अपने डेमोस्ट्रेशन में छात्र/छात्राओं को विस्तार पूर्वक समझाया कि किस प्रकार उत्पादकों की पेकेजिंग निर्माण किया जाता है। डिजाईन प्रारम्भ करने सेे पहले इस्तेमाल होने वाली बारीकियों को विस्तार पूर्वक बताया। उसके उपरान्त उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी उत्पाद की पेकेजिंग निर्माण कैसे होती हैै, डिजाईन प्रारम्भ करने के पहले कम्पनी के विषय में संपूर्ण जानकारी  जानी जाती है कि कम्पनी क्या-क्या उत्पाद कर रही है तथा उनको उपभोग करने वाले उपभोक्ता कौन हैं। उसके बाद डिजाईन बनना प्रारम्भ करते हुए ज्यायमितिय आकारों का प्रयोग किया गया। तथा पेकेजिंग के डिब्बों को बनाकर उनपर विद्यार्थियों द्वारा रफ स्केच डिजाईन किया गया। तथा देखा गया कि डिजाईन कैसा लग रहा है। फाईनल डिजाईन होने के बाद जल कलर का प्रयोग कर पेकेजिंग डिजाईन को पूरा किया गया। इसके बाद रष्किन मलिक ने विद्यार्थियों द्वारा बनाये गये पेकेजिंग डिजाईन को कम्प्यूटर द्वारा तैयार करने बताये, जिससे पेकेजिंग पूर्ण रूप से तैयार किया गया। 

कार्यशाल के आयोजन में ललित कला विभाग की विभागाघ्यक्षा श्रीमति रूपल मलिक, संकाय सदस्य रजनीकान्त, श्रीमति अनु, श्रीमति बिन्नू पुण्ड़ीर, रीना त्यागी, कु0 हिमांशु , मयंक सैनी, का विषेष योगदान रहा।


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