मुजफ्फरनगर से वेस्ट यूपी में नकली दवा सप्लाई करने वाला रैकेट पकड़ा


बागपत। जिले के ड्रग्स विभाग द्वारा अमीनगर सराय में बड़े पैमाने पर चल रहे  नकली दवा के कारोबार का भंडाफोड़ किया है। ड्रग्स इंस्पेक्टर और सिंघावली अहीर पुलिस की संयुक्त छापेमारी में अमीनगर सराय के एक मकान में मुजफ्फरनगर से पैकिंग कर मार्केट में बेचने के लिए लाई गई दवाईयों की खेप के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जबकि नकली दवा बनाने के इस कारोबार का मुख्यारोपी अभी तक फरार है। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर निवासी एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। 

बागपत के ड्रग्स इंस्पेक्टर वैभव बब्बर ने बताया कि विभाग के मुखबिर की सूचना पर रविवार देररात्रि अमीनगर सराय कस्बे में गफ्फार पुत्र हारून के मकान में विभागीय अधिकारियों के साथ पुलिस टीम द्वारा छापेमारी की गई। मकान के एक कमरे में दवाएं पैक करने की मशीन रखी हुई थी। वहां मिले सुरेन्द्र पुत्र रंजीत के कब्जे प्रचलित एंटीबायोटिक ऑग्मेंटिन टैबलेट व प्रिंटेड फॉयल, उल्ट्रेसट टेबलेट फिनिशेड समेत अन्य भारी मात्रा में दवाईयां खुली हुई पडी मिली । मौके पर दो नमूने लेकर कमरे में रखी पैकिंग मशीन को जब्त करने के साथ अन्य उत्पाद भी सील कर दिया। पकड़े गए आरोपी सुरेंद्र ने पूछताछ में बताया कि गफ्फार ही इस कार्य को करता था, जिसमें मुजफ्फरनगर निवासी बलराज मुजफ्फरनगर से कच्चा माल लाकर देता था। जिसे अमीनगर सराय में पैकिंग करने के बाद बाजार में बेचा जाता है । इस मामले में ड्रग्स इंस्पेक्टर वैभव बब्बर की तहरीर पर सिंघावली अहीर थाना पुलिस ने गफ्फार व बलराज के खिलाफ नकली दवा तैयार कर सप्लाई करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपी सुरेंद्र को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। दवाओं के नमूने जांच के लिए मेरठ भेज दिये गए हैं।

ड्रग्स इंस्पेक्टर ने बताया कि सुरेंद्र ने पूछताछ में मुजफ्फरनगर के बलराज का नाम बताया था। जिसमें जांच चल रही थी कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने बलराज को नकली दवाई सप्लाई करने के मामले में गिफ्तार कर लिया। अमीनगर सराय का गफ्फार फरार हो गया है। दो माह पहले गफ्फार दवाई पैकिंग करने की मशीन लेकर आया था। जिसमें मुजफ्फरनगर का बलराज कच्चा माल लेकर आता था। बताया कि मशीन नहीं चलने के कारण दवाईयां यही पर रखी थी l जो अभी तक मार्केट में नहीं भेजी जा सकी।

ड्रग्स इंस्पेक्टर ने बताया कि कच्चे माल को पैक करने में पांच से 10 रुपये का खर्चा आता है और बाजार में उसकी कीमत 200 रुपये हो जाती है, जल्दी अमीर बनने के लालच में उन्होंने ये काम शुरू किया था। जिसमें माल सप्लाई करने से पहले ही भंडाफोड़ हो गया।

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