शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

केंद्र हुआ सख्त, राज्य कोरोना की चैन तोड़ने के लिए इस मॉडल पर लागू करे लॉकडाउन

 नई दिल्ली । भारत में लगातार दो दिनों से रिकॉर्ड 2 लाख से ज्यादा कोरोना वायरस के मामले आ रहे हैं। राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के इतने मामले आए हैं जितने महामारी के बाद से कभी नहीं आए थे। दिल्ली में भी बेकाबू कोरोना को देखते हुए वीकेंड कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया है जो आज से लागू होगा। हालांकिए बीते एक हफ्ते के दौरान हुई बैठकों में केंद्र ने राज्य सरकारों को यह सलाह दी है कि वे कोरोना की लगाम कसने के लिए ब्रिटेन के मॉडल को अपनाएं। 


केंद्र ने कहा है कि राज्यों को लोकल मूवमेंट पर प्रतिबंध लगाने होंगेए टीकाकरण में तेजी लानी होगी और इतना ही नहीं दूसरे राज्यों से डॉक्टर भी मंगाने चाहिए ताकि स्थानीय हेल्थकेयर वर्कफोर्स पर पड़ रहा दबाव कम किया जा सके। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिकए राज्यों को कोरोना की स्थिति से निपटने के लिए यूनाइटेड किंगडम का उदाहरण दिया गया है। यूके में बीते साल दिसंबर में कोरोना के नए स्ट्रेन के मिलने के बाद से कंटेनमेंट ज़ोन बनाए गए और वहां सख्त लॉकडाउन लगाया गयाए साथ ही टीकाकरण की गति को भी तेज किया गया। वहींए भारत की रणनीति फिलहाल लॉकडाउन की बजाय माइक्रो.कंटेनमेंट की है। इससे लोकल मूवमेंट तो रुकता है लेकिन एक राज्य से दूसरे राज्यों के बीच आवाजाही जारी रहती है। 

सूत्रों के मुताबिक, यह दावा करना कि यूके की आबादी 6ण्6 करोड़ की है और इसलिए उसने अपनी दो तिहाई आबादी को टीका लगा दिया और इसके परिणाम स्वरूप वहां मामले कम होने शुरू हुए हैंए तो यह गलत धारणा है। क्योंकि जब आप साइंटिफिक पेपर्स देखेंगे तो पाएंगे कि यूके में कोरोना के मामले इसलिए घटने शुरू हुए हैं क्योंकि उन्होंने सख्त लॉकडाउन के बीच टीकाकरण किया है। राज्यों को यह बता दिया गया है कि जब आप लॉकडाउन नहीं लगातेए तो माइक्रो.कंटेनमेंट बनाने होंगेए आवाजाही पर रोक लगानी होगीए ज्यादा से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच करनी होगी। 

 केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मध्य प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। इस मीटिंग में भी इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य में लोगों की गैर.जरूरी आवाजाही और इकट्ठे होने पर रोक लगाई जानी चाहिएए खासतौर पर शहरी इलाकों मेंए जहां से कोरोना विस्फोट हो सकता है।

खबर के मुताबिक,कोरोना की दूसरी लहर डॉक्टरों और स्वास्थकर्मियों के लिए भी बड़ी घातक साबित हो रही है। केंद्रीय टीम ने राज्यों से कहा है कि डॉक्टरों और नर्सों की ड्यूटी का चार्ट बने और उन्हें ऑफ मिले। इतना ही नहीं राज्यों को यह भी बताया गया है कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत वे कॉन्ट्रैक्ट पर स्वास्थ्यकर्मियों को रख सकते हैं। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों ने डॉक्टर और नर्सों को एक साल के कॉन्ट्रैक्ट पर रखा है। ये नर्सें ओडिशा और पश्चिम बंगाल की हैं। 


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