नरेश टिकैत मेरे भी चौधरी हैं :डॉ संजीव बालियान




मुजफ्फरनगर। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉक्टर संजीव बालियान ने कहा कि कुछ लोगों के पोस्टर लगाने से गांव में भाजपा का जनाधार खत्म नहीं हो जाता है। उन्होंने कहा कि चौधरी नरेश टिकैत उनकी बालियान खाप के चौधरी हैं उनके साथ उनका रिश्ता बराबर रहेगा। 

आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा के बहिष्कार को लेकर गांव में लगे पोस्टरों को राजनीतिक साजिश बताते हुए उन्होंने कहा कि गांव में तमाम राजनीतिक दलों से जुड़े हुए लोग हैं। एक दो लोगों के पोस्टर लगाकर भाग जाने से कुछ नहीं होता है। उन्होंने कहा कि वे निरंतर गांव में जा रहे हैं और लोगों के साथ संपर्क कर रहे हैं। उनका कहना था कि जहां तक किसानों के मुद्दे की बात है तो उसको लेकर सरकार पूरी तरह सजग है और तमाम स्तर पर बातचीत की जा रही है। एमएसपी को वैधानिक दर्जा देने के साथ-साथ तमाम मुद्दों पर सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। हाल में मुजफ्फरनगर में हुई किसान पंचायत के नाम पर लोटा नमक मामले की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस जिन लोगों को उन्होंने चुनाव में हराया था वही लोग यह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक चौधरी नरेश टिकैत की बात है तो वह भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष होने के साथ-साथ बाजार खाप के चौधरी भी हैं और इस नाते उनके भी चौधरी है ऐसे नाम से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। कांट्रैक्ट फार्मिंग के विरोध को लेकर उन्होंने कहा कि जहां तक कांट्रैक्ट फार्मिंग की बात है तो सबसे पहले उत्तर प्रदेश में यह कांट्रैक्ट फार्मिंग शुरू हुई। तमाम चीनी मिलों द्वारा किसानों का गन्ना कांट्रेक्ट के आधार पर ही दिया जाता है। उसी के आधार पर उसके दाम तय होते हैं तथा रकबे के आधार पर गन्ने की खरीद की जाती है। उन्होंने सवाल किया कि किसानों की जमीन खोस लेने की बात करने वाले बताएं कि कितने चीनी मिलों ने कितने किसानों की जमीन आज तक छीनी है। उन्होंने कहा कि सरकार साफ कर चुकी है कि एमएसपी जारी है और रहेगी। इस सरकार ने पहली बार किसान को अधिकार दिया है कि वह कहीं भी देश में अपनी उत्पाद बेच सकता है। पहले यहां का किसान दूसरे प्रदेश में जाता था तो उसको तमाम स्थान पर उत्पीड़न और रिश्वत का शिकार होना पड़ता था हर नाके पर उससे पैसा वसूल किया जाता था उसका उत्पीड़न किया जाता था। अब किसान देश में कहीं भी ले जाकर अपना उत्पाद बेचने के लिए आजाद है। पश्चिम उत्तर प्रदेश का किसान अपना उत्पाद लेकर हरियाणा जाता था तथा वहां उसे उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता था सभी खुली हुई हैं। उन्होंने कहा कि गुड पर शुल्क 2:30 से लेकर 1:30 प्रतिशत करने का काम भी की सरकार ने किया है।

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