तर्क पर बात करें किसान नेता : अशोक बालियान


मुजफ्फरनगर। देश की राजधानी दिल्ली में किसान लगभग डेढ़ माह से आंदोलनरत है। एक तरफ़ कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान आंदोलन में सरकार के साथ वार्ता के लिए आने वाले किसान नेता कृषि सुधार के लिए बनाए गये तीनों क़ानूनों को रद्द करने की ज़िद पर अड़े रहते है।सरकार चाहती है कि किसान नेता तीनों कृषि क़ानूनों के एक-एक क्लॉज़ पर तर्क व तथ्यों के साथ बात करें। 

इन वार्ताओं में बैठक के दौरान जब सरकार तीनों क़ानूनों के एक-एक प्रावधान पर तर्क व तथ्यों के साथ बातचीत करने को कहती है तो बैठक में शामिल किसान नेता या तो मौन धारण कर लेते है या पीठ फेर लेते है।और क़ानूनों के प्रावधानों  पर तर्क व तथ्यों के साथ बात करने से मना कर देते है।

       किसान नेताओं का कहना है कि सरकार क़ानूनों में तर्क व तथ्यों के आधार संशोधन की बात कर रही है, परन्तु हम क़ानून वापस लेने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे, हम तर्क व तथ्यों पर बात नही करेंगे।

     पंजाब के कुछ किसान नेताओं ने यह भी कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट की बात भी नही मानेगे। उन्होंने यह भी कहा कि हम कृषि विशेषज्ञों की समिति बनाने के सरकार के प्रस्ताव पर भी सहमत नही होंगे और न किसी की मध्यस्था भी स्वीकार नही है। इससे लगता है कि पंजाब के ये कुछ किसान नेता देश के किसानों के वास्तविक हितैषी नही है।

       भारत में आजादी के बाद सबसे अधिक उपेक्षा कृषि व ग्रामीण सेक्टर की हुई है।किसान परिवार में जन्म लेने के कारण मेरा चिंतन कृषि व ग्रामीण सेक्टर के लिए रहा है। मेरे मन में किसान आन्दोलन पर एक किताब लिखने का विचार आया। मेरा कभी लेखन का कार्य नहीं रहा था, फिर भी मेने  किसान आन्दोलन पर एक किताब लिखने  का कार्य शुरू किया।

        चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने भारत में किसान आन्दोलन को एक नई पहचान दी और किसान आन्दोलन को दुनिया के स्तर पर ले जाकर उनकी मांगो को विश्व के सामने रखा। मुझे भी किसान आन्दोलन में भारत के विभिन राज्यों व दुनिया के अनेको देशो में जाने का मौका मिला। मेने आपनी इस पुस्तक में  किसान आन्दोलन में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की भूमिका पर प्रकाश डाला था।मुझे उम्मीद है कि किसान इस पुस्तक को पढ़ कर आपनी उपेक्षा के प्रति जागरूक होंगे। मेरी इस पुस्तक का विमोचन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री एच .डी.देवगोडा ,उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री रोमेश भंडारी,किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत  व शाही इमाम श्री अब्दुल्ला बुखारी  सहित अनेक गणमान्य लोगो के कर कमलो से हुआ था।

   चौधरी टिकैत साहब हमेशा वार्ता से समस्याओं को हल करने विश्वास रखते थे। उन्होंने हमेशा अपने नेतृत्व में सामूहिक विचार-विमर्श के साथ आंदोलन चलाये है। हम इस आंदोलन में नेतृत्व कर रहे नेताओं से भी कहना चाहते है कि वे तर्क व तथ्यों के साथ तीनों कृषि सुधार के क़ानूनों पर वार्ता करें क्योंकि एक बड़ा वर्ग इन क़ानूनों को कृषि की उन्नति के लिए उचित मानता है।क़ानून में संशोधन की गुंजाइश हमेशा रहती है। इसलिए यदि इन क़ानूनों में कोई प्रावधान किसान के हित का नही है तो उस पर संशोधन का प्रस्ताव रखा जा सकता है। 

      न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर कृषि उपज न बिके,इसके लिए वार्ता होनी आवश्यक है,क्योंकि यह माँग उचित है। आज भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत का बयान आया है कि वार्ता में शामिल कुछ किसान नेता वार्ता में सहमति होने पर अड़चन डालते है जो उचित नही है। भारतीय किसान यूनियन देश का सबसे बड़ा किसान संगठन है इसलिए उसे इन सब बातों पर विचार करना चाहिए।

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