Thursday, September 9, 2021

रबी की फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि का स्वागत किया


 मुजफ्फरनगर । केंद्र सरकार द्वारा गेहूं, जौ, चना और सरसों सहित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि का पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने स्वागत किया है। 

 उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2020-21 के लिए गेहूं, जौ, चना और सरसों सहित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा की है। गेहूं की एमएसपी 1,975 से बढ़ाकर 2,015 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर की 5100 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 5,500, सरसों की एमएसपी 4.650 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल, चने की एमएसपी 5,100 रुपए से बढ़ाकर 5,230 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है। खरीफ (गर्मी) फसलों की कटाई के तुरंत बाद अक्टूबर से रबी (सर्दियों) फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। 

बालियान ने कहा कि एमएसपी बढ़ाए जाने के बाद किसानों को सरसों की लागत से 100 प्रतिशत फायदा मिलेगा, वहीं मसूर पर लागत का 79 प्रतिशत, चना पर 74 प्रतिशत और सूरजमुखी पर 50 प्रतिशत फायदा मिलेगा।  पिछली केंद्र सरकार के समय वर्ष 2009 से वर्ष 2014 के बीच 1.52 लाख मीट्रिक टन दाल की खरीद हुई थी, जबकि मोदी सरकार के समय वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के मध्य 76.85 लाख मीट्रिक टन दाल किसानों से खरीदी है।

 उन्होंने कहा कि केंद्र की मनमोहन सरकार के वर्ष 2009-10 से 2013-14 तक पांच वर्ष में गेंहू का एमएसपी 320 रूपये प्रति क्विंटल बढ़ा, जबकि केंद्र की मोदी सरकार के वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक पांच वर्ष में गेंहू का एमएसपी 440 रूपये प्रति क्विंटल बढ़ा।  केंद्र की पिछली सरकार ने जहाँ वर्ष 2013-14 में किसानों से 33,874 करोड़ रुपये की गेहूं की खरीद की थी, वही मोदी सरकार ने वर्ष 2020-21 में किसानों से करोड़ 75000 करोड़ रुपये की गेहूं की खरीद की थी। केंद्र की पिछली सरकार ने जहाँ वर्ष 2013-14 में किसानों से 63,928 करोड़ रुपये की धान की खरीद की थी, वही मोदी सरकार ने वर्ष 2020-21 में किसानों से करोड़ 1,72,752 करोड़ रुपये की धान की खरीद की थी। यह किसान हित का एक बड़ा कदम है। इस प्रकार पिछली सरकार के मुकाबले मोदी सरकार ने  एमएसपी भी बढ़ाया और खरीद भी अधिक की है। 

उन्होंने कहा कि कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) का एमएसपी तय करने का आधार ए-2 फार्मूला, जिसमे कि‍सान की ओर से किया गया सभी तरह का भुगतान चाहे वो कैश में हो या कि‍सी वस्तु की शक्ल में, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च जोड़ा जाता है। ए2+एफएल फार्मूला में  ए2 के अलावा परि‍वार के सदस्यों द्वारा खेती में की गई मेहतन का मेहनताना भी जोड़ा जाता है।

   तीसरा फार्मूला सी-2 (Comprehensive Cost) होता है, जिसमे लागत ए2+एफएल के ऊपर होती है और इसमें कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है। केंद्र सरकार एमएसपी निर्धारित करने के लिए सीएसपी ए2+एफएल  और सी2 दोनों लागतों पर विचार करती है, लेकिन अंत में वह इसे ए2+एफएल  के आधार पर निर्धारित करती है। कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) ‘सी2’ कॉस्ट्स को बेंचमार्क रिफरेंस कॉस्ट्स (अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट्स) के तौर पर प्रयोग करती है। 

उनके अनुसार किसानों की यह मांग उचित है कि कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा अनुशंसित 1.5 गुना एमएसपी फॉर्मूला ‘सी2’ लागतों पर पूरी तरह लागू किया जाना चाहिये। हालांकि उडद, अरहर, सोयाबीन, कपास, मक्का, बाजरा व् रागी जैसी उपज के एमएसपी में ‘सी2’ फार्मूला से भी अधिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 में डॉ स्वामीनाथन के ए2+एफएल फार्मूला के आधार पर गेंहू की लागत 923 रूपये प्रति क्विंटल व् ‘सी2’ लागत के आधार पर 1425 रूपये प्रति क्विंटल थी तथा वर्ष 2021-22 में ए2+एफएल फार्मूला के आधार पर गेंहू की लागत 960 रूपये प्रति क्विंटल व् ‘सी2’ लागत के आधार पर 1467 रूपये प्रति क्विंटल है। इस वर्ष 2021-22 में गेहूं की एमएसपी 2,015 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की है, जो ‘सी2’ लागत के आधार पर 185 रूपये प्रति क्विंटल कम है, लेकिन ए2+एफएल फार्मूला के आधार पर 575 रूपये प्रति क्विंटल अधिक है।  भारत के कृषि उत्पादन का स्वरूप एक असाध्य से असंतुलन से जूझ रहा है। दो मुख्य खाद्यान्न गेहूं और धान तो लगातार आवश्यकता से अधिक पैदा हो रहे हैं, जबकि दाल और तिलहन का उत्पादन मांग की अपेक्षा काफी कम रहता है। किसानों के लिए एमएसपी के अलावा सार्वजनिक संग्रह प्रणाली, पब्लिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम (पीपीएस) और कृषि उत्पादों की समय से खरीद भी जरूरी है। तथा दूध, शहद, मुख्य फलों और सब्ज़ियों के लिए भी एमएसपी होना चाहिए। कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की एक रिपोर्ट के अनुसार अब दाल और तिलहन का एमएसपी बढने से किसान उच्च मूल्य मिलने वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। दाल जैसी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र की न्यूनतम समर्थन मूल्य की नीति कारगर सिद्ध होती दिख रही है। किसानों को उसकी उपज का एमएसपी के अलावा खुले बाजार में बेहतर मूल्य मिले, इसलिए केंद्र सरकार ने कृषि कानून बनाये है। इन कृषि क़ानूनों से कृषि उपज की बिक्री हेतु एक नई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार होगी, जो वर्तमान मंडी व एमएसपी व्यवस्था के साथ-साथ चलती रहेगी। इससे फ़सलों के भंडारण, विपणन, प्रसंस्करण, निर्यात आदि क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा और साथ ही किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरसों व् मसूर की दाल पर 400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से किसानों की आय में बड़ा इजाफा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाये जा रहे हैं और भविष्य में भी इसी तरह वृद्धि होती रहेगी। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)  के दायरे में कुछ और कृषि उपज को लाने व उनका बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार के सामने मांग उठती रहती है। हम उम्मीद करते है कि किसानों को अभी तक जिन फसलों पर ‘सी2’ लागत के आधार पर फसलों का एमएसपी नही मिल रहा है, वह भी मिलना चाहिए।

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