नाला निर्माण विवाद के बाद जल निगम के अधिकारियों ने लोगों के साथ किया पुन: सर्वे



मुजफ्फरनगर। नाला निर्माण किसी दूसरी दिशा में हो सकता है या नही इसके लिए कार्यदायी संस्था जल निगम के अधिशासी अभियंता पीके चहल ने अपने विभाग के अधिकारियों की टीम और द.रामपुरी के समाजसेवी मनीष चौधरी, राजकुमार गिरी, श्रीपाल नायक, दिनेश गुप्ता, चमन ठाकुर आदि कई लोगों को साथ लेकर नाला निर्माण के लिए पुन: सर्वे किया। सर्वे टीम शाहबुद्दीनपुर रोड पर आगे काली नदी तक भी गई। द.रामपुरी के लोग चाहते हैं कि नाला निर्माण शाहबुद्दीनपुर रोड के किनारे हो और काली नदी से करीब एक किलोमीटर पहले के नाले में इसे मिला दिया जाएं। हालांकि यह जगह करीब चार किलोमीटर दूर है। शासन से केवल साढ़े सात करोड़ का बजट मिला है और इतना बड़ा नाला बनाने में करीब बीस करोड रुपए चाहिए। इसके अलावा नाले का पानी काली नदी में नही डाला जा सकता है। यह पर्यावरण नियमों के विऱद्ध है। हरित प्राधिकरण इस पर एक्शन ले सकता है। समाजसेवी मनीष चौधरी का कहना है कि शाहबुद्दीनपुर रोड पर नाला निर्माण उचित विकल्प है।

जल निगम के अधिकारियों ने नाले को रुड़की रोड पर लाकर जनकपुरी के नाले में भी मिलाने के विकल्प पर विचार किया लेकिन जनकपुरी का नाला ऊंचाई पर है जबकि उत्तरी रामपुरी और एकता विहार निचाई पर बसे हैं। ऐसे में पानी का फ्लो सही नही रहेगा। उल्टे जनकपुरी के नाले का पानी भी उत्तरी रामपुरी के नाले में आकर परेशानी खडी कर सकता है। राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि जनकपुरी नाला यदि ऊंचाई पर नही होता तो समस्या हल हो सकती थी। अभी फिलहाल दक्षिणी रामपुरी के लोगों को रविवार की देर सायं आवास पर बुलाकर इसका हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।

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