कोरोना काल के लुटेरों को कहां जगह मिलेगी?





मुजफ्फरनगर । ना आक्सीजन और ना दवाएं। दवाओं के मनमाने दामों की वसूली और प्रशासन की चुप्पी शहर वासियों को खल रही है। 

आक्सीजन के हालात तो लगता है सरकार और प्रशासन के काबू से बाहर हैं। प्रशासन के कब्जे में जाते ही आक्सीजन कार्बनडाइआक्साइड हो गई है। चहेतों के लिए सबकुछ है आम आदमी दिन भर धक्के खाकर खाली हाथ लौट रहा है। मरीज रामभरोसे हैं। लूट का हाल यह है कि बाजार में पांच सौ के आक्सीमीटर पर रेट चार हजार और कीमत वसूली जा रही डेढ से दो हजार। बाजार में ऐसी अनेक दवाएं हैं जिनपर दस गुना अधिक तक खुदरा मूल्य अंकित है। पहले कम रेट पर मिलने वाली इन दवाओं को प्रिंट रेट पर बेचा जा रहा है। बाला जी चौक के पास सिन्धी मैडिकल हब पर जब खरीदार ने आपत्ति की तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। मेडिकल स्टोर्स पर पूरे अप्रैल माह में भीड़ ही उमड़ी रही और कोविड गाइडलाइन हवा में उडती रही। सभी को कोरोना संक्रमण से निजात दिलाने वाली आइवरमैक्टिन, एजिथ्रोमाइसिन, डॉक्सी, पेरासिटामोल के अलावा विटामिन सी, जिंक की गोलियां चाहिए। जिन लोगों का पांच दिन में बुखार नही उतर रहा उनके लिए फैबीफ्लू की आवश्यकता है। फैबीफ्लू तो रेमडीसिविर इजैक्शन की तरह से पहले से ही बाजार से गायब है। लोग इसकी खोज में मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर पर चक्कर लगाते हुए घूमते हैं। फैबीफ्लू दवा जबर्दस्त ब्लैक में मिल रही है। वही कोरोना प्रोटोकॉल में काम आने वाली विटामिन सी, मल्टी विटामिन, जिंक आदि की दवाओं पर किल्लत का साया है। इसके अलावा खांसी और बुखार की दवा के साथ ही शुगर की दवाओं की किल्लत भी दिखाई दे रही है। आक्सीमीटर, नेमोलाइजर, स्टीम लेने वाले स्टीम उपकरण, थर्मामीटर के दाम भी एक महीने में दोगुने हो गए हैं। लैब्स की हालत यह है कि कई कई दिन में रिपोर्ट मिल रही है।

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