सोमवार से लगेंगे होलाष्टक


मुजफ्फरनगर । रंगों का पर्व होली से पहले सोमवार से होलाष्टक शुरू होंगे। 

मान्यता है कि होली के दिन दैत्य सम्राट हिरण्यकश्यपु ने भगवान विष्णु की भक्ति में लीन अपने पुत्र प्रहलाद को जलाकर मारने के लिए अग्नि स्नान का वरदान प्राप्त अपनी बहन होलिका की गोद में बैठा कर जिंदा जलाने का प्रयास किया था लेकिन प्रभु कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जल गई थी। हास परिहास और रंगों के त्योहार होली से आठ दिन पूर्व फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तिथि तक होलाष्टक लग जाते हैं। मान्यता है कि होलाष्टम में किसी भी तरह का मांगलिक कार्य और घर वाहन व भूमि की खरीद नहीं की जाती है।

महामृत्युंजय मिशन के संयोजक पंडित संजीव शंकर ने बताया कि होलिका दहन से आठ दिन पूर्व फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि से होलाष्टक प्रारंभ होते हैं। इस बार होलाष्टक 22 मार्च 2021 से 28 मार्च तक रहेंगे। हालांकि अष्टमी तिथि 21 मार्च को सुबह 7.10 बजे से आ जाएगी लेकिन उदयतिथि में अष्टमी 22 मार्च को होने के कारण उसी दिन से होलाष्टक का प्रारंभ रहेगा। होलिका दहन 28 मार्च को किया जाएगा और इसके बाद अगले दिन 29 मार्च को रंगों और गुलाल से होली खेली जाएगी। पंडित संजीव शंकर के अनुसार होलाष्टक के आठ दिन के समय में किसी भी तरह का मांगलिक कार्य जैसे विवाह समारोह, नए मकान का मुर्हुत, गृहप्रवेश, किसी कार्य के लिए भूमि पूजन समेत अन्य मांगलिक कार्य नही किए जाते हैं। इसके अलावा नए वाहन आदि की खरीद को भी यदि इस अवधि में नही किया जाएं तो अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिन के समय में दैत्य राजा हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र प्रहलाद को यातनाएं दी थी। इसी कारण इन दिनों में मांगलिक कार्य नही होता है। पंडित संजीव शंकर के अनुसार फाल्गुन मास में भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है इसलिए होलाष्टक में भगवान की पूजा अर्चना करने से शुभ फल प्राप्त होता है। इसके अलावा हनुमान जी की पूजा अर्चना भी की जानी चाहिए।

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