पर्यावरण संरक्षण के लिए शुकतीर्थ से शुरू हुई गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा



शुकतीर्थ । पौराणिक नगरी शुकतीर्थ से पर्यावरण संरक्षण के लिए आज अनूठी पहल हुई। जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन को बचाने के लिए जन-जन को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक और प्रेरित करने को गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा समिति, प्रान्त मेरठ के निर्देशन में 867.5 किमी लंबी 21 दिवसीय गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा का आज भव्य शुभारंभ किया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दस जिलों में गंगा और यमुना के किनारे बसे कस्बों और गांवों से गुजरने वाली इस यात्रा के दौरान विशेष रूप से जन-जन को पेड़ लगाओ, पानी बचाओ और पालिथीन हटाओ का संदेश देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस यात्रा के साथ ही शिक्षण संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और नारी शक्ति आदि के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पर्यावरण संरक्षण का महत्व और संदेश पहुंचाया जाएगा और इस पुनीत कार्य में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा का समापन 17 मार्च 2021 को नरौरा में होगा।

शुकतीर्थ से यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व गंगा घाट पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया और इसके पश्चात् नगर में भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। कलश यात्रा के समापन पर हवन-यज्ञ आयोजित किया गया। हवन आचार्य बृज किशोरी तिवारी ने संपन्न कराया। बाद में उपस्थित विशाल जनसमूह ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए शपथ ली। इसी के साथ 21 दिवसीय गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा प्रारंभ हो गई। यात्रा मुजफ्फरनगर जनपद के विभिन्न कस्बों और गांवों से होते हुए बीआईटी भगवन्तपुरम पहुंची। इस दौरान सभी प्रमुख स्थानों पर संकल्प सभाओं का आयोजन किया गया। संकल्प सभाओं में आम लोगों ने प्रकृति संरक्षण के लिए विशेष रूप से शपथ ली कि वह खुद पर्यारवरण को संरक्षित रखेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। सभी ने यह भी शपथ ली कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कार्य नहीं करेंगे। शुकतीर्थ से भगवन्तपुरम् तक मार्ग में विभिन्न स्थानों पर आम लोगों ने यात्रा का भव्य स्वागत करते हुए गंगा, यमुना, भारत माता का जयघोष किया।  

गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा के शुभारंभ पर प्रमुख संत-महात्मा, नारी शक्ति, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्य, राष्ट्रीय सह संयोजक राकेश जैन मेरठ प्रांत के संयोजक रामअवतार, यात्रा के सह प्रमुख बिजेन्द्र शर्मा , यात्रा आयोजन समिति के प्रमुख डा. संजय गुप्ता, यात्रा संचालन समिति के प्रमुख मयंक अग्रवाल, गंगा मंदिर शुक्रताल से पंडित धर्मेंद्र शर्मा, पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे स्वयंसेवी, समाज के सभी वर्गों के लोग विशेष रूप से उपस्थित रहे।           

बिजनौर बैराज पर गंगा आरती का भव्य आयोजन

बीआईटी भगवन्तपुरम् से गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा शाम के समय बिजनौर बैराज पर पहुंची। बैराज पर गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया। गंगा आरती में यात्रा के साथ चल रहे संत समाज के लोगों के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और गंगा माता के संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया। इससे पूर्व भगवंतपुरम् से बिजनौर की सीमा में पहुंचने पर गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। यात्रा का रात्रि पड़ाव बिजनौर में रहा। कल सुबह बिजनौर से यह यात्रा विदुर कुटी की ओर प्रस्थान करेगी। प्रस्थान से पूर्व गंगा सफाई अभियान का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा कलश यात्रा, हवन-यज्ञ और संकल्प सभा भी आयोजित की जाएगी।    

पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज से आगे आने का आह्वान

शुकतीर्थ/बिजनौर। गंगे च यमुने प्रकृति संरक्षण यात्रा के दौरान आयोजित सभाओं में वक्ताओं ने आम लोगों से आह्वान किया कि पर्यावरण के साथ जन-जीवन और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। हमें अगली पीढ़ियों के लिए अभी से स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल आदि के विषय में विचार करना होगा अन्यथा बहुत देर हो जाएगी और जीवन के अस्तित्व को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सभी को आज से ही प्रयास करना है और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना है। पर्यावरण संरक्षण का कार्य अकेले सरकार नहीं कर सकती। इसके लिए आम जनमानस को आगे आना ही होगा। 

वक्ताओं ने चिंता जताई कि वर्तमान समय में पृथ्वी पर केवल 20 प्रतिशत पेड़ बचे हैं, जबकि स्वच्छ पर्यावरण के लिए धरा पर 30 प्रतिशत पेड़ होने चाहिए। इस कमी को हम सभी को अधिक से अधिक पेड़ लगाकर पूरा करना है। वहीं, अगर पेयजल की बात करें तो पृथ्वी पर पेयजल केवल एक प्रतिशत है। ऐसे में यदि अभी से पेयजल का संरक्षण नहीं किया गया तो पेयजल की विकराल समस्या खड़ी हो सकती है। बिना पेयजल के हम अपने अस्तित्व की कल्पना भी नहीं कर सकते। दूसरी ओर समाज के लिए आज पालीथीन बड़ी समस्या बनी हुई है। पालीथीन में रखे गए खाद्य पदार्थ कैंसर का कारण बन रहे हैं। पालीथीन अगर जड़ों में पहुंच जाए तो पेड़ बेकार हो जाता है। पालिथीन खाकर पशु मर रहे हैं। ऐसे में पालिथीन से हर हाल में निजात पाने का संकल्प लेना जरूरी है। हम सभी को मिलकर सिंगल यूज का प्लास्टिक का प्रयोग पूरी तरह से बंद करना होगा। 

यात्रा के दौरान सभाओं को संत समाज के साथ विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्य और राष्ट्रीय सहसंयोजक राकेश जैन ने संबोधित किया



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